बिहार में जातीआधारित गणना का रिपोर्ट जारी ,मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गाँधी जयंती के मौके पर

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बिहार में जातीय गणना का आंकड़ा जारी कर


दि गई है।आज सोमवार को 2 अक्टूबर गांधी जयंती के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह फैसला लिया कि बिहार में जो जाति आधारित गणना करवाई गई उसका रिपोर्ट जारी कर दिया गया है। गांधी जयंती के दिन पर जाति आधारित गणना 2022 कार्य के सर्वेक्षण के आंकड़े को प्रकाशित कर दिया गया है। इसको लेकर सर्वदलीय बैठक में फैसला किया गया था जाति आधारित गणना करने के प्रस्ताव पर कर मुहर लगी थी।

जाति आधारित गाना रिपोर्ट में जो आँकड़े दिए गए हैं उसके मुताबिक राज्य में सामान्य वर्ग की कुल आबादी 15.52 है। यह ख़बर आप पुनपुन एक्सप्रेस ब्लॉग पर पढ़ रहे हैं।अनुसूचित जाति की कुल जनसंख्या 19.56 है। अनुसूचित जनजाति की कुल संख्या 1.68% है।  पिछड़ा वर्ग 27.12% है। अत्यंत पिछड़ा वर्ग 36. 01 है। कोइरी- 4.2 कुर्मी- 2.8 कायस्थ- .60 मोची, चमार, रविदास- 5.2 ब्राह्मण- 3.65 भूमिहार- 2.86 मुसहर- 3.08 राजपूत- 3.45 बनिया- 2.31 मल्लाह- 2.60 यादव- 14.26 है।


इस रिपोर्ट के मुताबिक, अब बिहार की आबादी 13 करोड़ से ज्यादा है। इनमें हिंदू समुदाय की आबादी 81.9%, मुस्लिम की आबादी 17.7%, ईसाई 0.05%, सिख- 0.01%, बौद्ध 0.08%, जैन 0.0096% और अन्य धर्म के लोगों की आबादी 0.12% है।  13 करोड़ से ज्यादा की आबादी में 10.07 करोड़ हिंदू और मुस्लिम की आबादी 2.31 करोड़ है।

दरअसल,  राज्य में जातीय गणना का पहला चरण  7 जनवरी से शुरू हुआ था। इस चरण में मकानों की सूचीकरण, मकानों को गिना गया। यह चरण 21 जनवरी 2023 को पूरा कर लिया गया था। जातीय गणना का दूसरा चरण 15 अप्रैल से शुरू हुआ था। जिसे 15 मई को पूरा हो जाना था। लोगों से डेटा जुटाए गए। दूसरे चरण में परिवारों की संख्या, उनके रहन-सहन, आय आदि के आंकड़े जुटाए गए।

अपर मुख्य सचिव विवेक सिंह ने कहा एक जून 2022 को सर्वदलीय बैठक में बिहार में जाति आधारित गणना कराने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इसके बाद दो जून 2022 को राज्य मंत्री परिषद द्वारा दिए गए निर्णय के आधार पर राज्य में जाति आधारित गणना को दो चरणों में फरवरी 2023 तक संपन्न करने का निर्णय लिया गया था।

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