मसौढी के गांधी मैदान में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीरामकथा के दूसरे दिन काफी संख्या में जुटे श्रद्धालु

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मसौढी के गांधी मैदान में आयोजित सप्तदिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के द्वितीय दिवस में कथा व्यास जगतगुरु रामानुचार्य श्री


गोविन्दाचार्य गुप्तेश्वर जी महाराज ने भगवान की कथा श्रवण का महत्व बताते हुए कहा कि यह मनुष्य को समस्त कल्मष से मुक्त कर परमगति का अधिकारी बनाता है। एक बार भगवान शंकर जी सती के साथ अगस्त्य ऋषि के आश्रम में पहुंच कर भगवत्कथा कथा का कथन व श्रवण किये। लेकिन, सती जी कथा को भाव नहीं दिये। उस समय भगवान श्रीराम जी का वनवास लीला चल रहा था। जिस रास्ते से दोनों लौट रहे थे उसी मार्ग से श्रीराम जी भी लक्ष्मण जी के साथ सीता जी को ढूंढते हुए लीला से रोते पुकारते जा रहे थे। उन्हें देखकर भगवान शंकर जी जय सच्चिदानन्द कहकर प्रणाम किये जिससे सती जी को भ्रम हो गया कि मनुष्य कहीं भगवान हो सकता है और

भगवान हैं तो मोहवश रो क्यों रहे हैं। शंकर भगवान बहुत समझाये पर उनके भ्रम का निवारण नहीं हुआ। तो शंकर भगवान के कहने पर खुद परीक्षा लेने गई। वे सीता जी का रूप धारण कर गई। लेकिन भगवान श्रीराम जी के अलौकिक प्रभाव को देखकर डर गई। शंकर भगवान को जब पता चला कि ये सीता जी बनी हैं जिन्हें हम माता मानते हैं तो सती जी का परित्याग कर दिये। सती जी अपने पिता के यज्ञ में भस्म होकर अगले जन्म में राजा हिमाचल की पुत्री पार्वती के रूप में जन्म ली। वहां घोर तपस्या कर शंकर भगवान को प्रसन्न कर उनसे विवाह की और शंकर भगवान को प्रसन्न कर भगवान श्रीराम जी के जन्म एवं दिव्य कर्म, लीलाओं को श्रद्धापूर्वक सुनकर ज्ञान प्राप्त की। वही पावन कथा श्रीरामचरितमानस कहलाये। इनके श्रवण व चिंतन-मनन से मानव के सभी प्रकार के मोह भ्रम का नाश होता है और मानव परम कल्याण को प्राप्त करता है। कथा में आयोजन समिति के सदस्यों के साथ काफी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित होकर भाव के साथ कथा का श्रवण किये।

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